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Sunday, November 22, 2020

Shri Achleshwar Dhaam Mandir, Batala


जब भगवान गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर तीनों लोकों की परिक्रमा को पूरा बता दिया था तो भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय स्वामी नाराज होकर जिस स्थान पर आए थे, वह आज अचलेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि कार्तिक माह की नवमी-दशमी को 33 कोटि (प्रकार)  देवी-देवता यहां पधारते हैं। जानिए पंजाब के बटाला से सात किलोमीटर दूर स्थित इस धाम की अनूठी धार्मिक आस्था

मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने पुत्रों गणेश और कार्तिकेय से कहा कि वे उसी को अपना उत्तराधिकारी बनाएंगे जो तीनों लोकों की परिक्रमा कर पहले कैलाश पर पहुंचेगा। यह सुनकर दोनों यात्रा पर निकल गए। भगवान गणेश को रास्ते में नारद मुनि मिले जिन्होंने कहा कि समस्त लोक तो माता-पिता के चरणों में हैं। ऐसा सुनते ही गणेश कैलाश लौट आए और माता-पिता की परिक्रमा कर उन्हें प्रणाम किया। इस पर भगवान शिव ने अपना उत्तराधिकारी गणेश को बना दिया। 
 
जब कार्तिकेय को इस बात का पता चला तो वो नाराज हो गए। वे रूठकर उस स्थान पर पहुंचे जो आज अचलेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि उस समय कार्तिकेय को मनाने 33 कोटि देवी-देवता इसी स्थान पर आए थे लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अब वह कहीं नहीं जाएंगे और सारा जीवन उसी स्थान पर रहेंगे। इसके बाद भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि इसी स्थान पर हर साल कार्तिक माह की नवमी-दशमी को 33 कोटि (प्रकार) देवी-देवता आएंगे और मंदिर परिसर में बने सरोवर में स्नान करने वालों की मन्नत पूरी होगी।

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